Indian Geography gk question answer in Hindi | जियोग्राफी gk क्वेश्चन इन हिंदी

Geography GK question answer in Hindi | पृथ्वी और उसका सौर्यिक संबंध 

आज हम लोग पढ़ने जा रहे हैं इस अध्याय में आप लोग पढ़ेंगे Geography Gk जो बिल्कुल हिंदी में होगा जो क्वेश्चन आंसर के साथ दिया गया है। यहां आप लोग पढ़ेंगे पृथ्वी की परिभ्रमण, पृथ्वी की आंतरिक संरचना, सूर्य ग्रहण ,चंद्र ग्रहण, समय का निर्धारण ,समय जोन ,भूपर्पटी ,अक्षांश ,देशांतर रेखाएं , का निर्धारण समय जून विश्वत रेखा ,कटिबंध इत्यादि के बारे में।

Indian Geography gk question answer in Hindi
जियोग्राफी Gk इन हिंदी 

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  • यहाँ आपको मिलेंगे पृथ्वी  से सम्बंधित कई जानकारी मिलेंगी जैसे , भूपर्पटी ,अक्षांस , देसान्तर रेखाएं ,सर्या  ग्रहण ,चंद्रग्रहण ,  समय  का निर्धारण ,समय जोन , विषुवत रेखा , कटिबंध ,सर आइजक  न्यूटन केंद्रीय भाग , लैहमन सम्बद्धता   इत्यादि  बारे में जानेंगे

इस खंड में भारत की नदियों, पर्वतों, राज्यों और प्रमुख स्थानों से संबंधित प्रश्न हैं।

क्रमप्रश्नउत्तर
1भारत की सबसे लंबी नदी कौन-सी है?गंगा (2,525 किमी)
2क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का विश्व में कौन-सा स्थान है?सातवाँ
3भारत की प्राचीनतम पर्वत श्रृंखला कौन-सी है?अरावली श्रेणी
4'अन्नाईमुडी' किस भारतीय क्षेत्र की सबसे ऊँची चोटी है?दक्षिण भारत/प्रायद्वीपीय भारत
5भारत का कौन-सा राज्य तीन ओर से बांग्लादेश से घिरा है?त्रिपुरा
6'सिलिकॉन वैली' के नाम से किस भारतीय शहर को जाना जाता है?बेंगलुरु
7कर्क रेखा भारत के कितने राज्यों से होकर गुजरती है?आठ
8भारत में सबसे बड़ी मीठे पानी की झील कौन-सी है?वुलर झील (जम्मू-कश्मीर)
9भारत का दक्षिणतम बिंदु (Southernmost Point) क्या कहलाता है?इंद्रा पॉइंट
10'हीराकुंड बांध' किस नदी पर निर्मित किया गया है?महानदी (ओडिशा)
11भारत और चीन के बीच की सीमा रेखा को क्या कहते हैं?मैकमोहन रेखा
12सुंदरवन का डेल्टा कौन-सी नदियाँ बनाती हैं?गंगा और ब्रह्मपुत्र
13कपास की खेती के लिए सबसे उपयुक्त मिट्टी कौन-सी है?काली मिट्टी (रेगुर मिट्टी)
14'पुलिकट झील' किन दो राज्यों की सीमा पर स्थित है?आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु
15जोजिला दर्रा भारत के किस राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में स्थित है?लद्दाख

भाग 2: विश्व भूगोल और सामान्य अवधारणाएँ (World Geography)

इस खंड में महाद्वीपों, महासागरों, वायुमंडल और प्रमुख वैश्विक तथ्यों से संबंधित प्रश्न हैं।

क्रमप्रश्नउत्तर
16विश्व की सबसे लंबी नदी कौन-सी है?नील नदी (अफ्रीका)
17विश्व का सबसे बड़ा महासागर कौन-सा है?प्रशांत महासागर
18सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह कौन-सा है?बृहस्पति (Jupiter)
19वायुमंडल में सर्वाधिक मात्रा में पाई जाने वाली गैस कौन-सी है?नाइट्रोजन (78%)
20विश्व की सबसे गहरी झील कौन-सी है?बैकाल झील (रूस)
21किस महाद्वीप को 'अंध महाद्वीप' कहा जाता है?अफ्रीका
22'पनामा नहर' किन दो महासागरों को जोड़ती है?प्रशांत महासागर और अटलांटिक महासागर
23ओजोन परत किस वायुमंडलीय परत में पाई जाती है?समताप मंडल (Stratosphere)
24स्वेज नहर के खुलने से किन दो स्थानों के बीच की दूरी कम हो गई है?यूरोप और एशिया (मुंबई और लंदन के बीच)
25किसे 'जापान का मैनचेस्टर' कहा जाता है?ओसाका
26विश्व में चाय का सबसे बड़ा उत्पादक देश कौन-सा है?चीन
27विश्व का सबसे ऊँचा जलप्रपात (Waterfall) कौन-सा है?एंजिल जलप्रपात (वेनेजुएला)
28'भूगोल का जनक' किसे माना जाता है?इरेटोस्थनीज
29पृथ्वी को 1 डिग्री देशांतर घूमने में कितना समय लगता है?4 मिनट
30उत्तरी ध्रुव पर पहुँचने वाला पहला व्यक्ति कौन था?रॉबर्ट पियरी
इसे भी पढ़े हिंदी में।  


प्रकाश चक्र  : वैसी काल्पनिक रेखा जो पृथ्वी के प्रकाशित और अप्रकाशित भाग को बांटती है। 

Geography GK question answer in Hindi
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  • पृथ्वी की परिभ्रमण की दिशा पश्चिम से पूर्व है।  जिसका कक्षा में  पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है वह द्रिघवृत्तीय है अंत: 3 जनवरी को सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी अपेक्षाकृत कम हो जाती है,  जिसे उपसौरिक  की स्थिति कहते हैं।   यह दूरी 9 . 15 करोड मिल है।   इसके विपरीत उत्तरायण की स्थिति में 4 जुलाई को पृथ्वी सूर्य से   दूर चली जाती है , इसको अपसौरिक कहते हैं।  यह दूरी 9. 45 करोड़ मिल होती है।  
  • एपसाइड रेखा : उपसौरिक एव  अपसौरिक को  मिलाने वाली काल्पनिक रेखा सूर्य के केंद्र से गुजरती है. उसे एपसाइड रेखा कहते हैं। 
  • अक्षांश  :  यह गलोंब  पर पश्चिम से पूरब की ओर खींची गई काल्पनिक रेखा  है जिसे अंश में प्रदर्शित किया जाता है।  वास्तव में अक्षांश वह कोण  है,  जो विषुवत रेखा तथा किसी अन्य स्थान के बीच पृथ्वी के केंद्र पर बनती है। 
  •  विश्वत रेखा को शून्य  अंश की स्थिति में माना जाता है।  यहां से उत्तर  की ओर बढ़ने वाली कोणिक  दूरी को उत्तरी अक्षांश तथा दक्षिण में बढ़ने वाली दूरी को दक्षिणी अक्षांश कहते हैं. इसकी अधिकतम सीमा पर ध्रुव है , जिन्हें 90 डिग्री उत्तरी ,  दक्षिणी अक्षांश कहा जाता है।   सभी अक्षांश रेखाएं समांतर होती है।   वे दो अक्षांसो के बीच की दूरी जोन के नाम से जानी जाती है।   दो अक्षांसो  के मध्य दूरी 11 1 किलोमीटर होती है। 
अक्षांश
  • देशांतर  : यह ग्लोब पर उत्तर से दक्षिण की ओर खींची जाने वाली काल्पनिक रेखा है.  यह रेखाये  समांतर नहीं होती यह रखा है। ये रेखाएं  उत्तरी तथा दक्षिणी ध्रुव पर एक बिंदु पर मिल जाती है।  ध्रुवो  से विषुवत  रेखा की ओर बढ़ने पर देशांतरो  के बीच की दूरी बढ़ती जाती है। 
  •  तथा विश्वत रेखा पर इसके बीच की दूरी अधिकतम 111.32 किलोमीटर होती है।  ग्रीनविच वेधशाला से गुजरने वाली रेखा को 0  डिग्री देशांतर माना जाता है।  इसकी बाई की रेखाएं पश्चिमी देशांतर और दाहिनी ओर की रेखाएं पूर्वी देशांतर कहलाती है। 
  •  देशांतर के आधार पर ही किसी स्थान का समय ज्ञात किया जाता है.  दो देशांतर रेखाओं के बीच की दूरी गोरे (gore)  नाम से जानी जाती है. 
  •  शून्य  अंश एव  शून्य  अंश   देशांतर अटलांटिक महासागर में काटती है। 
  •  संक्रांति सूर्य के उत्तरायण और दक्षिणायन की सीमा को सक्रांति कहते हैं। 
  •  कर्क संक्रांति : 21 जून को सूर्य कर्क रेखा 23. 5  पर लंबवत होता है , इसे कर्क संक्रांति कहते हैं।  जिस दिन उत्तरी गोलार्ध में सबसे बड़ा दिन होता है। 
  • मकर सक्रांति :  22 दिसंबर को सूर्य मकर रेखा पर लंबवत होता है।  इसे मकर संक्रांति कहते हैं।  इस दिन दक्षिणी गोलार्ध में सबसे बड़ा दिन होता है। 
  • विषुव :  यह पृथ्वी का वह स्थिति है जब सूर्य की किरण विषुवत  रेखा पर लंबवत पड़ती है  , और सर्वत्र दिन और रात बराबर होते हैं। 
  •  22 सितम्बर  21 मार्च को संपूर्ण पृथ्वी पर दिन और रात बराबर होते हैं इसे क्रमशः
  •  शरद विषुव  एवं वसंत विषुव  कहते हैं। 
  • सूर्य ग्रहण:  जब कभी दिन के समय सूर्य और पृथ्वी के बीच में चंद्रमा के आ जाने से सूर्य की चमकती सतह पर  चंद्रमा के कारण दिखाई नहीं पड़ने लगती है तो इसी स्थिति को सूर्य ग्रहण करते हैं।  जब सूर्य का एक भाग छिप  जाता है तो उसे आंशिक सूर्यग्रहण और जब पूरा सूर्य ही कुछ क्षणों के लिए छिप जाता है तो उसे पूर्ण सूर्यग्रहण कहते हैं।  पूर्ण सूर्यग्रहण हमेंशा  अमावश्या  को  ही होता है। 
सूर्य ग्रहण
  • चंद्र ग्रहण : जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आ जाती है तो सूर्य की  पूरी रोशनी चंद्रमा पर नहीं पड़ती इसे चंद्रग्रहण कहते हैं।   चद्रग्रहण  हमेशा पूर्णिमा की रात्रि में ही होता है।  प्रत्येक पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण नहीं होता क्योंकि चंद्रमा और पृथ्वी के कक्षा 5 डिग्री का अंतर होता है , जिसके कारण चंद्रमा कभी पृथ्वी के ऊपर से या नीचे से गुजर जाता है  . 1 वर्ष में अधिकतम 3 बार पृथ्वी के ऊपर क्षेत्र से चंद्रमा गुजरता है तभी चंद्र ग्रहण लगता है ,  सूर्य ग्रहण के समान चंद्रग्रहण भी  आंशिक अथवा पूर्ण  हो सकता है।  
changrahan
  • समय का निर्धारण  :  एक देशांतर का अंतर होने पर समय में 4 मिनट का अंतर होता है।  चुकी  कि पृथ्वी पश्चिम से पूरब की ओर घूमती है।  फलत: पूरब की ओर बढ़ने पर प्रत्येक देशांतर पर समय 4:00 मिनट बढ़ता जाता है।   तथा पश्चिम की जाने पर प्रत्येक देशांतर पर  4:00 मिनट घटता जाता है। 
  • अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा : 180 डिग्री देशांतर को अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा कहते हैं। 1884 ईसवी में वाशिंगटन में संपन्न इंटरनेशनल मेरिडियन कॉन्फ्रेंस में 180वे योम्योतर  को अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा निर्धारित किया गया है। 
  •  ऐसा इसलिए किया गया ताकि विभिन्न देशों के मध्य यात्रियों को कुछ स्थानों पर 1 दिन का अंतर होने के कारण परेशानी ना हो।  अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा आर्कटिक  सागर , चुकी सागर ,  बेरिंग स्ट्रेट एवं प्रशांत महासागर से गुजरती है।  ग्रीनविच मेरिडियन से गणना करते हुए इस रेखा के पूर्व वाले क्षेत्र 1 दिन आगे होंगे या दूसरे शब्दों में इस रेखा से पश्चिम वाले क्षेत्रों से 12 घंटे आगे होंगे। 

  • जब कोई जलयान पश्चिम दिशा में यात्रा करते हुए तिथि रेखा को पार करता है तो उसे 1 दिन की हानि होती है क्योंकि इस क्षेत्र में समय 12 घंटे पीछे  चल रहा होता है ( जैसे सोमवार के बाद रविवार आना ) परंतु यदि जलयान पूर्व की यात्रा करते हुए तिथि रेखा को पार करता है तो 1 दिन का लाभ होता है जैसे- यदि वह सोमवार को यात्रा प्रारम्भ  करता है तो  तिथि रेखा पार करने पर क्षेत्र में बुधवार का दिन उसे प्राप्त होगा। 

नोट - बेरिंग जल संधि अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा के समांतर स्थित है। 
  • समय जोन व मानक समय:  विश्व को 24 समय जोनो  में विभाजित किया गया है इस समय जनों को ग्रीनविच मीन टाइम व मानक समय में 1 घंटे के अंतराल के आधार पर विभाजित किया गया है अर्थात प्रत्येक जून 15 डिग्री के बराबर होता है।  ग्रीनविच याम्योत्तर जीरो डिग्री देशांतर पर है जो ग्रीनलैंडव  नार्वे नियन  सागर व ब्रिटेन , स्पेन , अल्जीरिया , फ्रांस,  मार्ले ,बर्फ़ीनाफासो  घाना व  दक्षिण अटलांटिक समुंदर से गुजरता है।  
  • प्रत्येक देश का मानक समय ग्रीनविच मीन टाइम से आधे घंटे के अंतर पर निर्धारित किया जाता है।  मानक समय स्वेछा  से चयनित याम्योत्तर का स्थानीय समय होता है  जो एक विशिष्ट क्षेत्र या देश के लिए मानक समय निर्धारित करता है।  भारत में 82 गुना 1 बटा 2 डिग्री पूर्वी देशांतर जो इलाहाबाद के निकट मिर्जापुर से गुजरती है ,के समय को मानक समय  को माना गया है।  यह  समय 5.30  घंटा  आगे है।  अतः  ग्रीनबीच में दोपहर  के 12 बजे हो तो   उस समय भारत में  5:30 बजेंगे। 
  • विषुवत  रेखा  : पृथ्वी के मध्य सतह से होकर जाने वाली व अक्षांश रेखा है  जो उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव से बराबर दूरी पर होती है।  यह  0 अंश की अक्षांश रेखा है।  विषुवत  रेखा के ऊपरी भाग को उत्तरी गोलार्ध और दक्षिणी भाग दक्षिणी  गोलार्ध  कहते है। 

  •  कटिबंध : प्रत्येक गोलार्ध को ताप के आधार पर कई भागों में बांटा गया है  इन भागो  को कटिबंध कहते हैं।  यह निम्न है ----

  1.   उषणकटिबन्ध : कटिबंध विषुवत रेखा से 30 डिग्री उत्तरी 30 डिग्री  दक्षिणी का भाग यहां वर्ष में दो बार शीर्ष  पर चमकता है. इस भाग का मौसम सदैव गर्म रहता है। 
  2.  उपोषण कटिबंध:  30 डिग्री से 45 डिग्री उत्तरी अक्षांश के बीच  स्थित क्षेत्र जहां कुछ  महीने ताप अधिक और कुछ काम रहता है। 
  3. शीतोष्ण  कटिबंध :  45  डिग्री से 66 डिग्री उत्तरी अक्षांश के बीच  का क्षेत्र यहाँ सूर्य सिर  के ऊपर कभी नहीं चमकता बल्कि उसकी  किरणे  तिरछी होती है।  अतः यहाँ  ताप  हमेशा कम रहता है। 
  4.  धुर्वीय  कटिबंध : 66 डिग्री से ९०  डिग्री के मध्य स्थित  क्षेत्र जहां ताप  अत्यंत ही कम  रहती जिसके फलस्वरूप  हमेशा बर्फ जमी  रहती है। 

पृथ्वी की आंतरिक संरचना

पृथ्वी की आंतरिक संरचना

  •  पृथ्वी की आंतरिक संरचना  के संबंध में वैज्ञानिकों में मतभेद है।  भूगर्भ में पाई जाने वाली परतो  की मोटाई , घनत्व ,तापमान, भार ,एवं वहां पाए जाने वाले पदार्थ की प्रकृति पर भी पूर्ण सहमति नहीं हो पाई है।  फिर भी तापमान, दबाव, घनत्व ,भूकंपीय तरंगों, पर  परमाणो  को एकत्रित करके पृथ्वी की आंतरिक संरचना के संबंध में जानकारी प्राप्त करने के प्रयास किए गए है। 

  •  पृथ्वी के अंदर के हिस्से को तीन भागों में बांटा गया है.

  1.  भू-पर्पटी 
  1. आवरण 
  1. एवं केंद्रीय भाग
  •  भूपर्पटी :  पृथ्वी के ऊपरी भाग को भूपर्पटी कहते हैं अंदर की तरफ 34 किलोमीटर तक का क्षेत्र है।  यह मुख्यतः  बेसाल्ट चट्टानों से बना है। 
 इसके दो भाग्  है ---
  1.                          सियाल 
  2.                           सिमा 
  •  सियाल   क्षेत्र में सिलिकॉन एवं एलुमिना एवं सीमा क्षेत्र में सिलिकन  एंड मैग्निशियम की बहुलता होती है।  क्र र्स्ट भाग का औसत घनत्व 2 .7 ग्राम सेंटीमीटर घन  है।   यह  पृथ्वी के कुल आयतन का 0.5% परसेंट भाग घेरे  हुए हैं। 
  • भूपटल की रचना सामग्री :  सबसे अधिक ऑक्सीजन (46. 80%) दूसरे स्थान पर सिलिकन (27. 72%) और तीसरे स्थान पर एलमुनियम (8. 13%) परसेंट है। 
  •  मेटल  : 2900  किलोमीटर मोटा यह क्षेत्र मुख्यतः बेसाल्ट पत्थरो  के समूह की चट्टानों से बना है।  मेंटल के इस हिस्से में मैग्मा चेंबर पाए जाते हैं।   इसका औसत घनत्व 3. 5 ग्राम सेंटीमीटर घन   से 5. 5 ग्राम सेंटीमीटर  गहन की है।   यह  पृथ्वी के कुल आयतन का 83% परसेंट भाग घिरे  हुए हैं।  
  • मोहसिविक डिस्कनेक्टिविटी : क्रस्ट एव  मेटल के बीच के सीमा क्षेत्र को कहते हैं। 
  •   रेपेटी असंबंधता :  ऊपरी मेटल  और निचले मेटल  के बीच के सीमा क्षेत्र को रेपेटी असंबंधता  कहते हैं।
  • पृथ्वी का औसत घनत्व 5 पॉइंट 5 ग्राम/सेमि  घन  एवं औसत त्रिज्या लगभग 6370 किमी है। 
  •  पृथ्वी के नीचे जाने पर प्रति 32 मीटर की गहराई पर तापमान 1 सेंटीग्रेड बढ़ता जाता है। 
  •  पृथ्वी के स्थलीय  क्षेत्र पर सबसे नीचे क्षेत्र जार्डन  में मृत सागर के आसपास का क्षेत्र है। 
  •  यह  क्षेत्र समुद्र तल से लगभग  400 मीटर नीचे है। 
  • सबसे पहले पाइथागोरस ने बताया कि पृथ्वी गोल है और यह आकाश में स्वतंत्र रूप से लटकी हुई है। 
  •  सर आइज़क न्यूटन ने साबित किया कि पृथ्वी  नारंगी के समान है. 

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