JEEViKA - BRLPS बिहार में ग्रामीण सशक्तिकरण & Aajeevika full Rodemap 2020-2021 Hindi me

बिहार सरकार के ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत कार्यरत बिहार ग्रामीण आजीविका प्रोत्साहन समिति (BRLPS), जिसे हम लोकप्रिय रूप से 'जीविका' के नाम से जानते हैं, राज्य के ग्रामीण विकास में एक ऐतिहासिक अध्याय लिख रही है। 2006 में एक छोटे पैमाने के प्रोजेक्ट के रूप में शुरू हुआ यह सफर आज एक विशाल राज्यव्यापी आंदोलन बन चुका है।

bihar aajeevika missin action plan 2020-2021

जीविका का मुख्य उद्देश्य (Objectives of JEEViKA)

जीविका का प्राथमिक लक्ष्य ग्रामीण गरीब परिवारों को सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। इसके प्रमुख कार्यों में शामिल हैं:

महिला संस्थानों का निर्माण: स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और उनके संघों का विकास करना।

वित्तीय समावेशन: गरीब परिवारों को ऋण और बेहतर सेवाओं तक पहुँच प्रदान करना।
स्व-रोजगार के अवसर: स्वरोजगार सृजन के लिए महिलाओं को सक्षम बनाना।
संस्थागत क्षमता: आजीविका के साधनों में सुधार के लिए महिलाओं के कौशल को निखारना।

एक दशक की उपलब्धियां: 2006 से अब तक

जीविका ने पिछले एक दशक में बिहार की बदलती तस्वीर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

  • विशाल नेटवर्क: मार्च 2020 के अंत तक, जीविका ने 1.15 करोड़ से अधिक परिवारों को जोड़कर 9.32 लाख SHGs का गठन किया है।
  • नोडल एजेंसी: 2011 में, जीविका को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के कार्यान्वयन के लिए नोडल एजेंसी घोषित किया गया।
  • परियोजना विस्तार: वर्तमान में, बिहार के 534 ब्लॉकों में मिशन मोड में काम हो रहा है:

  • NRLM: 234 ब्लॉकों में संचालित (जिसमें 89 ब्लॉक NRETP का हिस्सा हैं)।
  • BTDP (बिहार रूपांतरणकारी विकास परियोजना): विश्व बैंक समर्थित यह परियोजना 300 ब्लॉकों में प्रभावी है।

समुदाय संचालित विकास (Community Driven Development)

केंद्र स्तर पर NRLM और राज्य स्तर पर जीविका (BRLPS) ने गरीबी के खिलाफ लड़ाई में 'कम्युनिटी ड्रिवेन डेवलपमेंट' मॉडल को सफलता के शिखर पर पहुँचाया है।

इसकी कार्यप्रणाली (Modus Operandi) के मुख्य बिंदु:

  • समूह गठन: केवल महिला सदस्यों को मिलाकर स्वयं सहायता समूहों का निर्माण।
  • क्षमता निर्माण: गुणवत्ता मानकों और बेहतर प्रबंधन के लिए सदस्यों का प्रशिक्षण।
  • वित्तीय सहायता: वित्तीय संस्थानों से संसाधनों तक पहुँच सुनिश्चित करने के लिए नीतिगत सहायता (Hand-holding support)।
  • बाजार पहुंच: उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराना।

महिला उद्यमिता और भविष्य की राह

सरकार के इन प्रयासों से बिहार में महिला सशक्तिकरण और महिला उद्यमिता के सकारात्मक परिणाम दिखने लगे हैं। अब समय है कि पिछले अनुभवों और सीखों (Embedded Learnings) को अपनाते हुए इस मॉडल को और बड़े स्तर पर ले जाया जाए।

जैसे-जैसे SHG मॉडल परिपक्व हुआ है, इसने विभिन्न हितधारकों का भरोसा जीता है। भविष्य में दृष्टिकोण को और अधिक विविधतापूर्ण (Diversification) बनाकर सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन के इस कैनवास को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।


जीविका (JEEViKA) के भविष्य का रोडमैप: उत्पादकता, मूल्य संवर्धन और डिजिटल बैंकिंग

बिहार में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए जीविका (BRLPS) अब एक एकीकृत दृष्टिकोण (Integrated Approach) पर काम कर रही है। इसका मुख्य उद्देश्य न केवल उत्पादन बढ़ाना है, बल्कि ग्रामीण उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ना भी है।

1. संस्थागत मजबूती (Institutional Strengthening)

ग्रामीण संस्थानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जीविका निम्नलिखित रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित कर रही है:

  • CLF का सुदृढ़ीकरण: क्लस्टर स्तर के संघों (CLFs) को स्थायी बनाना।

  • डिजिटलीकरण: लेखांकन (Accounting) का पूर्ण डिजिटलीकरण ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

  • सुदृढ़ शासन: बेहतर गवर्नेंस संरचना और समय पर ऋण अदायगी सुनिश्चित करना।

  • सामाजिक मुद्दे: स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य सामाजिक विषयों पर सामुदायिक जागरूकता बढ़ाना।

2. व्यापक वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion & Literacy)

समुदाय की हर जरूरत के लिए मुख्यधारा के वित्तीय संस्थानों से संसाधन जुटाना प्राथमिकता है:

  • वित्तीय साक्षरता: ग्रामीण आबादी को बड़े स्तर पर बैंकिंग और निवेश के प्रति जागरूक करना।

  • ऋण सुविधाएं: SHGs और संघों को उद्यम (Enterprise), आवास (Housing) और OD सुविधा के लिए आसान ऋण दिलाना।

  • जोखिम प्रबंधन: जीवन, पशुधन और संपत्ति बीमा (Insurance) के माध्यम से परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना 

3. सस्टेनेबल एग्रीकल्चर और ऑर्गेनिक क्लस्टर

  • जीविका अब सतत कृषि (Sustainable Agriculture) को अगले स्तर पर ले जा रही है:
  • ऑर्गेनिक फार्मिंग क्लस्टर: अगले वित्तीय वर्ष में जैविक खेती के क्लस्टर विकसित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

  • वैल्यू चेन डेवलपमेंट: कृषि, पशुपालन और गैर-कृषि क्षेत्रों में 'उत्पादक संगठन' (Producer Organizations) बनाना ताकि छोटे किसानों को तकनीक, ऋण और मार्केटिंग की बेहतर सुविधा मिल सके।

4. ग्रामीण उद्यम और रोजगार सृजन (Rural Entrepreneurship)

ग्रामीण उद्यमियों को कौशल प्रशिक्षण और फॉरवर्ड-बैकवर्ड लिंकेज (बाजार संपर्क) प्रदान किया जा रहा है। इससे न केवल छोटे व्यवसायों का विस्तार हो रहा है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।

5. बैंकिंग का विस्तार: 'लास्ट माइल' सर्विस डिलीवरी

दूर-दराज के इलाकों तक बैंकिंग पहुँचाने के लिए जीविका बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट (BC Agent) मॉडल को स्केल-अप कर रही है:

  • CSP केंद्रों की स्थापना: बैंक शाखाओं के विकल्प के रूप में 'ग्राहक सेवा केंद्र' (CSP) ग्रामीण आबादी को उनके घर के पास बैंकिंग सेवाएं दे रहे हैं।

  • न्यू-एज बैंकिंग: आधुनिक तकनीक का उपयोग कर बैंकिंग फुटप्रिंट को बिहार के सबसे दुर्गम इलाकों तक पहुँचाना।


एक नज़र में जीविका की शक्ति (Impact Statistics)

घटक (Component)उपलब्धि (Achievement)
कुल संगठित परिवार1.09 करोड़
स्वयं सहायता समूह (SHG)9.17 लाख
ग्राम संगठन (VO)57 हजार
क्लस्टर लेवल फेडरेशन (CLF)965

जीविका (JEEViKA): वित्तीय सुरक्षा और आधुनिक कृषि तकनीक से ग्रामीण बदलाव

बिहार ग्रामीण आजीविका प्रोत्साहन समिति (BRLPS) ने वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) और कृषि उत्पादकता बढ़ाने की दिशा में क्रांतिकारी कदम उठाए हैं। इसका उद्देश्य न केवल गरीबी कम करना है, बल्कि ग्रामीण परिवारों को जोखिमों से बचाना और उनकी आय में वृद्धि करना भी है।

1. वित्तीय समावेशन और डिजिटल सशक्तिकरण (Financial Inclusion)

जीविका का मुख्य ध्यान स्वयं सहायता समूहों (SHG) के सदस्यों को बीमा योजनाओं से जोड़ने और वित्तीय प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाने पर रहा है:

  • डिजिटलीकरण: समुदाय आधारित संगठनों (CBOs) के लेनदेन को MIS (Management Information System) में दर्ज करना ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

  • रिसोर्स बुक कीपर रणनीति: प्रत्येक ब्लॉक में कुशल 'रिसोर्स बुक कीपर' के माध्यम से रिकॉर्ड बुक का संधारण और अपडेशन सुनिश्चित किया गया।

  • बैंक लिंकेज और ऋण: बैंकों से ऋण की मंजूरी, वितरण और प्रोजेक्ट फंड के रोटेशन पर विशेष जोर दिया गया।

  • वैकल्पिक बैंकिंग: डिजिटल फाइनेंसिंग, E-Shakti पायलट प्रोजेक्ट और LIC दावों के डेटा का समय पर प्रबंधन जैसी महत्वपूर्ण पहल की गईं।

2. कृषि उत्पादकता में वृद्धि (Productivity Enhancement)

खेती की लागत कम करने और संसाधनों के अधिकतम उपयोग के लिए जीविका ने नई तकनीकों को बढ़ावा दिया है:

  • SRI और DSR तकनीक: धान की खेती के लिए 'सिस्टम ऑफ रूट इंटेंसिफिकेशन' (SRI) और 'डायरेक्ट सीडेड राइस' (DSR) को प्रमोट किया गया।

  • जल संरक्षण: DSR तकनीक कम वर्षा और पानी की कमी वाले क्षेत्रों के लिए वरदान साबित हुई है। इसमें सिंचाई की कम आवश्यकता होती है, जिससे यह जलवायु अनुकूलन (Climate Adaptation) का एक बेहतरीन जरिया बन गया है।

  • बीज प्रतिस्थापन (Seed Replacement): स्थानीय बीजों के बजाय उन्नत हाइब्रिड बीजों के उपयोग को बढ़ावा दिया गया। लगभग 6.25 लाख महिला किसानों ने उत्पादकता बढ़ाने के लिए हाइब्रिड बीज अपनाए हैं।

3. कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC): खेती का मशीनीकरण

मजदूरों की कमी और खेती की बढ़ती लागत को देखते हुए जीविका ने 156 कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए हैं।

ये केंद्र पशु और मानव शक्ति पर निर्भरता कम कर मशीनी शक्ति को बढ़ावा देते हैं। यहाँ किसान आधुनिक खेती के उपकरण किराए पर ले सकते हैं, जिससे उत्पादकता में भारी सुधार हुआ है।


प्रमुख उपलब्धियां (Key Highlights)

पहल (Initiative)प्रभाव / संख्या
धान की खेती (उन्नत तकनीक)5.65 लाख से अधिक परिवार
DSR तकनीक अपनाने वाली महिला किसान40,948
हाइब्रिड बीज अपनाने वाली महिलाएं6.25 लाख
स्थापित कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC)156 केंद्र

आगामी लक्ष्य: वित्तीय वर्ष 2020-21 की योजना

आने वाले समय में जीविका का फोकस इन मुख्य बिंदुओं पर रहेगा:

  1. अति निर्धन परिवारों का जुड़ाव: छूटे हुए गरीब और अति गरीब परिवारों को समूहों से जोड़ना।

  2. उद्यमिता विकास: ग्रामीण उद्यमियों को ऋण प्राप्त करने और अपना व्यवसाय बढ़ाने के लिए प्रशिक्षित करना।

  3. वैल्यू चेन हस्तक्षेप: उत्पादक उद्यमों (Producer Enterprises) की स्थापना करना ताकि किसानों को उनके उत्पाद का सही मूल्य मिल सके।

  4. डोरस्टेप बैंकिंग: बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट (BC) मॉडल को और बड़ा करना ताकि बैंकिंग सेवाएं सीधे घर तक पहुँचें।

  5. सामाजिक जागरूकता: SVEP (स्टार्टअप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम) के तहत जागरूकता अभियान और ग्राम सभाओं में SHG सदस्यों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना।


निष्कर्ष: जीविका का एकीकृत मॉडल—जिसमें डिजिटल बैंकिंग, आधुनिक खेती और सामाजिक चेतना शामिल है—बिहार के ग्रामीण परिदृश्य को पूरी तरह से बदल रहा है।

अध्याय 1: सामुदायिक संस्थानों (CBFIs) का सुदृढ़ीकरण और विकास

बिहार ग्रामीण आजीविका प्रोत्साहन समिति (BRLPS) का लक्ष्य अब केवल समूहों का गठन करना नहीं, बल्कि उन्हें एक स्थायी सामुदायिक आधारित वित्तीय संस्थान (CBFI) के रूप में विकसित करना है। इसके लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है ताकि सदस्यों की आय के स्रोतों में विविधता आए और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो।

1. महिला स्वयं सहायता समूहों (WSHGs) का सशक्तिकरण

भारत में सबसे अधिक महिला स्वयं सहायता समूहों के साथ, जीविका ने बिहार के लगभग हर बसावट (Habitation) में अपनी पहुँच बना ली है। अब मुख्य फोकस इन समूहों के आंतरिक प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाने पर है।

सुदृढ़ीकरण के मुख्य बिंदु:

  • अगली पीढ़ी के मुद्दों का समाधान: सदस्यों की बचत बढ़ाना और बैठकों में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना।

  • पारदर्शिता और जवाबदेही: वित्तीय पारदर्शिता बनाए रखना और 'मासिक प्रतिवेदन' (Monthly Report) को नियमित रूप से जमा करना।

  • बुककीपिंग में दक्षता: सदस्यों को बही-खाता (Bookkeeping) संधारण में निपुण बनाना ताकि हिसाब-किताब सटीक रहे।

  • नेतृत्व का रोटेशन: समूहों में नेतृत्व परिवर्तन (Leadership Rotation) को बढ़ावा देना ताकि हर सदस्य को जिम्मेदारी संभालने का मौका मिले।

  • उद्यमिता की ओर कदम: सदस्यों की आकांक्षाओं को समझना और उन्हें उत्पादक समूहों (PG) या उत्पादक कंपनियों (PC) से जोड़ना।

2. स्वयं सहायता समूह संघों (VOs और CLFs) की मजबूती

जीविका के पास भारत में ग्राम संगठनों (VOs) और क्लस्टर स्तर के संघों (CLFs) का सबसे बड़ा नेटवर्क है। ये संघ स्वयं सहायता समूहों की रीढ़ की हड्डी के रूप में कार्य करते हैं।

संस्थागत स्थिरता के लिए रणनीतियाँ:

  • संस्थागत संरचना में स्थिरता: ग्राम संगठनों और CLFs की कार्यप्रणाली को और अधिक व्यवस्थित और पेशेवर बनाना।

  • डिजिटल समीक्षा प्रणाली: समीक्षा प्रणाली का डिजिटलीकरण (Digitization of Review System) करना ताकि प्रदर्शन का वास्तविक समय (Real-time) पर आकलन हो सके।

  • सामुदायिक पेशेवरों का क्षमता निर्माण: कैडर्स और सामुदायिक पेशेवरों को आधुनिक तकनीकों और प्रबंधन कौशल का प्रशिक्षण देना।

  • मॉडल संस्थानों का विकास: सर्वोत्तम प्रथाओं (Best Practices) के आधार पर 'मॉडल कम्युनिटी इंस्टीट्यूशन' विकसित करना, जो दूसरों के लिए प्रेरणा बन सकें।


आर्थिक रूपांतरण में इन संस्थानों की भूमिका

NRLM (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) के तहत ग्रामीण गरीबों के आर्थिक रूपांतरण के लिए इन संस्थानों की स्थिरता अनिवार्य है। यह संस्थान न केवल वित्तीय सेवाएं (ऋण, बचत) प्रदान करते हैं, बल्कि गैर-वित्तीय सेवाएं (शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक जागरूकता) भी ग्रामीण इलाकों तक पहुँचाते हैं।

संस्थान का स्तरमुख्य भूमिका
SHG (प्राथमिक स्तर)बचत, ऋण और सदस्यों का बुनियादी आर्थिक जुड़ाव।
VO (ग्राम संगठन)कई SHGs का समन्वय और सामाजिक मुद्दों पर कार्य।
CLF (क्लस्टर फेडरेशन)बड़े स्तर पर ऋण प्रबंधन, बैंकिंग लिंकेज और उद्यमों को बढ़ावा।

भविष्य की राह: सदस्यों के हितों का संरक्षण

इन संस्थानों को मजबूत करने का अंतिम उद्देश्य सदस्यों की रुचि को लंबे समय तक बनाए रखना है। जब ग्रामीण महिलाओं को लगेगा कि उनके संस्थान पारदर्शी, कुशल और लाभदायक हैं, तभी वे स्थायी रूप से आर्थिक मुख्यधारा से जुड़ी रह सकेंगी।

स्वयं सहायता समूह संघों (VOs & CLFs) का स्वावलंबन और कानूनी सुदृढ़ीकरण

बिहार ग्रामीण आजीविका प्रोत्साहन समिति (BRLPS) ने स्वयं सहायता समूहों के फेडरेशंस (VO और CLF) को एक औपचारिक और आत्मनिर्भर संस्थान बनाने के लिए कई नवाचारी कदम उठाए हैं। अब लक्ष्य इन्हें 'मॉडल सीएलएफ' (Model CLF) के रूप में स्थापित करना है।

1. औपचारिक संस्थागत ढांचा और कानूनी मान्यता

जीविका ने भारत के अन्य राज्य आजीविका मिशनों (SRLMs) के बीच एक मिसाल कायम करते हुए बिहार स्वावलंबी सहकारी समिति अधिनियम, 1996 के तहत:

  • 571 प्राथमिक स्तर के संघों और 07 केंद्रीय स्तर की सहकारी समितियों की स्थापना की है।

  • वैधानिक अनुपालन: पिछले दो वर्षों में वार्षिक ऑडिट (Annual Audit), आम सभा (AGM), और रिटर्न फाइलिंग जैसे वैधानिक कार्यों को समय पर पूरा करने पर विशेष जोर दिया गया है।

  • लोकतांत्रिक चुनाव: जीविका के इतिहास में पहली बार, 174 पंजीकृत प्राथमिक संघों के चुनाव बिहार चुनाव प्राधिकरण के माध्यम से संपन्न कराए गए हैं।

2. अगली पीढ़ी की चुनौतियाँ और समाधान (Next Generation Issues)

संघों को भविष्य के लिए तैयार करने हेतु जीविका निम्नलिखित बिंदुओं पर कार्य कर रही है:

  • पंचायातों का संतृप्ति (Saturation): सभी पंचायतों में समूहों और संघों की पहुँच सुनिश्चित करना।

  • पारदर्शी नेतृत्व: औपचारिक चुनाव के माध्यम से नेतृत्व का रोटेशन (Rotation of Leadership) और एक सक्रिय निदेशक मंडल (Board of Directors) तैयार करना।

  • डिजिटलीकरण: सदस्यों और पंजीकृत संघों के रिकॉर्ड, मासिक प्रतिवेदन और ग्रेडिंग का पूर्ण डिजिटलीकरण करना।

  • मानव संसाधन प्रबंधन: सामुदायिक पेशेवरों का चयन, उनका समय पर मूल्यांकन और भुगतान सुनिश्चित करना।

3. वित्तीय प्रबंधन और जवाबदेही

एक मजबूत वित्तीय प्रणाली ही संस्थानों को दीर्घकालिक सफलता दिला सकती है। इसके लिए मुख्य रणनीतियाँ हैं:

  • फंड रोटेशन: सामुदायिक कोष (Community Fund) का प्रभावी रोटेशन और समय पर ऋण वापसी (Repayment)।

  • बही-खाता संधारण: रिकॉर्ड बुक का समय पर रखरखाव और उनका डिजिटल बैकअप।

  • क्षमता निर्माण: स्टाफ, समुदाय और कैडरों को आधुनिक वित्तीय प्रबंधन के लिए प्रशिक्षित करना।


'मॉडल सीएलएफ' (Model CLF) विकसित करने की प्रमुख रणनीति

जीविका ने CLF को बेहतर तरीके से संचालित करने के लिए एक राज्य स्तरीय नोडल टीम का गठन किया है:

  • नेतृत्व: मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO, BRLPS) इस टीम के संयोजक हैं।

  • एंकर्स (Anchors): SPMU स्तर के सभी प्रोजेक्ट स्टाफ को 'सीएलएफ एंकर्स' के रूप में नामित किया गया है।

  • नियमित समीक्षा: ये एंकर्स हर महीने बैठक करेंगे और CLF की वित्तीय, प्रशासनिक और वैधानिक प्रणालियों की कार्यक्षमता की समीक्षा करेंगे।

रणनीतिक बिंदुमुख्य उद्देश्य
डिजिटल रिकॉर्डपारदर्शिता और त्वरित डेटा प्रबंधन सुनिश्चित करना।
कानूनी इकाईसंघों को एक कानूनी पहचान दिलाना ताकि वे अधिक संसाधनों तक पहुँच सकें।
संस्थागत मूल्यांकनसामुदायिक पेशेवरों के प्रदर्शन के आधार पर उनकी ग्रेडिंग करना।

जीविका (JEEViKA) का संगठनात्मक ढांचा: जिला और ब्लॉक स्तर पर सुदृढ़ीकरण

बिहार ग्रामीण आजीविका प्रोत्साहन समिति (BRLPS) ने संकुल स्तरीय संघों (CLFs) को प्रभावी बनाने के लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर एक मजबूत निगरानी और सहायता तंत्र विकसित किया है।

1. जिला और ब्लॉक स्तर पर नोडल अधिकारी

संस्थानों के सुचारू संचालन के लिए जिम्मेदारी का स्पष्ट विभाजन किया गया है:

  • जिला स्तर: जिला परियोजना प्रबंधक (DPM) जिला स्तर पर नोडल व्यक्ति होते हैं।
  • ब्लॉक स्तर: ब्लॉक परियोजना प्रबंधक (BPM) ब्लॉक स्तर पर नोडल व्यक्ति की भूमिका निभाते हैं।

2. CLF सुदृढ़ीकरण समिति (DPCU स्तर)

जिला स्तर पर एक विशेष 'CLF सुदृढ़ीकरण समिति' का गठन किया गया है।

  • सदस्य: इसमें मैनेजर (IB&CB), मैनेजर (CF), मैनेजर (MF), मैनेजर (फार्म/नॉन-फार्म), मैनेजर (SD) और फाइनेंस मैनेजर शामिल होते हैं।
  • कार्य: DPM के नेतृत्व में यह समिति CLF लीडर्स (अध्यक्ष और सचिव) और संबंधित BPM के साथ मासिक या त्रैमासिक बैठकें करती है। इसमें वित्तीय, प्रशासनिक और वैधानिक प्रणालियों की कार्यक्षमता की समीक्षा की जाती है।

3. CLF क्वालिटी टीम (ब्लॉक स्तर)

ब्लॉक स्तर पर कार्यक्षमता सुनिश्चित करने के लिए 'CLF क्वालिटी कमेटी' काम करती है।

  • सदस्य: इसमें CLF एंकर, अकाउंटेंट, आजीविका विशेषज्ञ, CLF बुक कीपर और प्रत्येक CLF से दो लीडर्स शामिल होते हैं।
  • कार्य: BPM के नेतृत्व में यह समिति वार्षिक कार्य योजना (AAP) के अनुसार CLF के प्रदर्शन, सामुदायिककरण और वैधानिक प्रक्रियाओं की मासिक समीक्षा करती है।


4. सीनियर CRP टीम और क्षमता निर्माण

सामुदायिक संस्थान के नेतृत्व और प्रशिक्षण के लिए सीनियर कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन्स (CRPs) की एक बड़ी टीम तैनात है:

  • अनुभवी नेटवर्क: वर्तमान में 270 सीनियर CRPs कार्यरत हैं, जिन्हें CBO नेतृत्व और CLF संचालन का गहरा अनुभव है। भविष्य में 150 नए सीनियर CRPs तैयार किए जा रहे हैं।
  • मुख्य भूमिका: ये CRPs ग्राम संगठनों (VOs) और CLFs को प्रशिक्षण देने, उप-समितियों के गठन, नेतृत्व परिवर्तन (Rotation) और वार्षिक आम सभा (AGM) के आयोजन में मदद करते हैं।


5. पंजीकरण और वैधानिक अनुपालन

संस्थानों को औपचारिक रूप देने के लिए निम्नलिखित प्रक्रियाएं अपनाई जा रही हैं:

  • पंजीकरण: 1.5 वर्ष पुराने सभी ग्राम संगठनों को प्रशिक्षण के बाद संबंधित CLF में जोड़ा जाता है। इसके बाद CLFs को उपयुक्त अधिनियम के तहत पंजीकृत किया जाता है।
  • व्यापक प्रशिक्षण: CLF के सदस्यों को गवर्नेंस, उप-समितियों के कार्य, कैडर प्रबंधन, नेतृत्व और ऑफिस मैनेजमेंट जैसे विषयों पर प्रशिक्षित किया जाता है।
  • AGM और ऑडिट: वैधानिक ऑडिट (Statutory Audit) के बाद, सभी पंजीकृत संघों के लिए वार्षिक आम सभा (AGM) का आयोजन अनिवार्य है ताकि पारदर्शिता बनी रहे।


निष्कर्ष: सुदृढ़ प्रबंधन से आत्मनिर्भरता

राज्य से लेकर ब्लॉक स्तर तक का यह त्रि-स्तरीय प्रबंधन ढांचा यह सुनिश्चित करता है कि जीविका के तहत बने सामुदायिक संस्थान न केवल गठित हों, बल्कि वे व्यावसायिक रूप से कुशल और कानूनी रूप से मजबूत भी बनें।

CLF का विजन बिल्डिंग, बिजनेस प्लान और वार्षिक कार्य योजना (AAP)

सामुदायिक संस्थानों को लंबी अवधि के लिए टिकाऊ बनाने के लिए जीविका द्वारा एक सुनियोजित रणनीतिक ढांचा तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य CLF को केवल एक समूह नहीं, बल्कि एक पेशेवर संस्थान के रूप में विकसित करना है।

1. विजन बिल्डिंग और कार्य योजना (AAP)

सभी संकुल स्तरीय संघों (CLFs) के साथ 'विजन बिल्डिंग' (भविष्य की परिकल्पना) का अभ्यास किया जाएगा।

  • प्रशिक्षण मॉड्यूल: विजन बिल्डिंग के लिए विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किए जाएंगे।

  • मास्टर ट्रेनर्स: परियोजना कर्मचारियों के बीच मास्टर ट्रेनर्स विकसित किए जाएंगे, जो CLF को उनकी वार्षिक कार्य योजना (AAP) और बिजनेस प्लान तैयार करने में मदद करेंगे।

  • संस्थागत लक्ष्य: यह अभ्यास CLF को अपने लक्ष्यों को स्पष्ट करने और उन्हें प्राप्त करने के लिए रोडमैप बनाने में सक्षम बनाएगा।

2. मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) प्रशिक्षण

ग्राम संगठनों (VO) और CLF के स्तर पर कार्यों में एकरूपता लाने के लिए सामुदायिक परिचालन नियमावली (Community Operational Manual) तैयार की गई है।

  • मुख्य विषय: गवर्नेंस (शासन), वित्तीय प्रबंधन, कैडर प्रबंधन, कार्यालय प्रबंधन, विवाद समाधान और CBOs की ग्रेडिंग।

  • प्रशिक्षक: यह प्रशिक्षण प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स, सामुदायिक संसाधन व्यक्तियों और सीनियर CRPs के माध्यम से दिया जाएगा।


3. CLF का स्टाफ प्रबंधन (CBO Staff Management)

एक औसत CLF के अंतर्गत 40-45 ग्राम संगठन (VO) आते हैं। इतने बड़े कार्यक्षेत्र को संभालने के लिए CLF स्तर पर निम्नलिखित मुख्य स्टाफ की नियुक्ति की जाएगी:

पद का नामसंख्यामुख्य जिम्मेदारी
CLF मैनेजर01संपूर्ण प्रबंधन और नेतृत्व।
CLF बुक कीपर01वित्तीय रिकॉर्ड और बही-खाता संधारण।
MIS असिस्टेंट01डेटा प्रबंधन और ऑनलाइन रिपोर्टिंग।
फील्ड वर्कर्स / क्लस्टर फैसिलिटेटर02-03क्षेत्र स्तर पर समूहों की निगरानी।
CLF एंकर (2 वर्ष के लिए)01शुरुआती हैंड-होल्डिंग और मार्गदर्शन।

नियुक्ति प्रक्रिया: स्टाफ की भर्ती सामुदायिक खरीद नीति (Community Procurement Policy) के अनुसार BPIU के सहयोग से पहली तिमाही में पूरी की जाएगी। इन कर्मियों को राज्य के भीतर या बाहर के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले संघों में 'इमर्शन' (क्षेत्रीय अनुभव) के लिए भेजा जाएगा।


4. कम्युनिटी स्पीयरहेड टीम (Community Spearhead Team)

प्रत्येक मॉडल CLF में 10-15 सदस्यों की एक 'कम्युनिटी स्पीयरहेड टीम' विकसित की जाएगी।

  • सदस्य: इसमें सक्रिय महिलाएं, संभावित नेता और सामुदायिक संसाधन व्यक्ति (CRPs) शामिल होंगे।

  • मुख्य कार्य: यह टीम CLF को सामुदायिक ग्रेडिंग सिस्टम स्थापित करने, ऋण वापसी (Repayment) सुनिश्चित करने, कैडर की समीक्षा करने और कमजोर समूहों के पुनरुद्धार (Revival) में सहायता करेगी।

5. गवर्नेंस नीतियों का क्रियान्वयन

CLF को उनके By-laws (उप-नियमों) और शासन नीतियों पर प्रशिक्षित किया जाएगा ताकि 'बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स' (BoD), 'रिप्रजेंटेटिव जनरल बॉडी' (RGB) और 'जनरल बॉडी' (GB) प्रभावी ढंग से निर्णय ले सकें। CLF मैनेजर और एंकर कम से कम एक वर्ष तक इन बैठकों का मार्गदर्शन करेंगे।


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