आप जानते हैं कि जिस कंप्यूटर माउस का इस्तेमाल हम आज चुटकियों में क्लिक करने के लिए करते हैं, वह शुरुआत में कैसा दिखता था? आज की डिजिटल दुनिया में माउस के बिना कंप्यूटर चलाना लगभग नामुमकिन है। लेकिन दुनिया का पहला माउस (World's First Computer Mouse) आज के आधुनिक और स्टाइलिश माउस से बिल्कुल अलग था।
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आइए जानते हैं माउस के दिलचस्प इतिहास और इसके महान आविष्कारक के बारे में।
दुनिया का पहला कंप्यूटर माउस: लकड़ी के बक्से से डिजिटल क्रांति तक का सफर
क्या आप जानते हैं कि दुनिया का सबसे पहला माउस लकड़ी का बना था? आज हम जिस माउस का उपयोग करते हैं, उसका इतिहास 60 के दशक से शुरू होता है। इस लेख में हम जानेंगे कि दुनिया का पहला माउस (World's First Mouse) किसने बनाया और जर्मनी के उस गुप्त आविष्कार के बारे में जिसे बहुत कम लोग जानते हैं।
डौग एंगलबार्ट: माउस के असली जनक
कंप्यूटर माउस के आविष्कार का श्रेय डौग एंगलबार्ट (Doug Engelbart) को जाता है। वे एक पूर्व नौसेना रडार तकनीशियन थे। 1960 के दशक के मध्य में स्टैनफोर्ड रिसर्च इंटरनेशनल (SRI) में उन्होंने पहले माउस का निर्देशन किया।
- निर्माण: डौग की अवधारणा (Concept) को बिल इंग्लिश (Bill English) ने हकीकत में बदला। इसीलिए बिल इंग्लिश को दुनिया का पहला माउस यूजर माना जाता है।
- बनावट: 1963 में बना यह माउस लकड़ी के एक हाथ से तराशे गए ब्लॉक जैसा था। इसमें केवल एक बटन था और नीचे दो पहिये लगे थे जो कर्सर की XY स्थिति (Position) को ट्रैक करते थे।
NLS माउस और पहला डिजिटल प्रदर्शन
1968 में डौग एंगलबार्ट ने NLS (On-Line System) का सार्वजनिक प्रदर्शन किया, जिसे आज "The Mother of All Demos" कहा जाता है।
- डिजाइन में बदलाव: प्रदर्शन के लिए इस्तेमाल किए गए बाद के मॉडल में तीन बटन थे।
- पेटेंट: 1970 में इसे "डिस्प्ले सिस्टम के लिए XY पोजीशन इंडिकेटर" के रूप में पेटेंट कराया गया।
- तकनीक: इसमें बॉल बेयरिंग और पोटेंशियोमीटर का उपयोग किया गया था, जिससे यह दुनिया का पहला डिजिटल माउस बना।
जर्मनी का गुप्त आविष्कार:- टेलीफ़ुकेन का "रोलकुगल" (Rollkugel)
ज्यादातर लोग केवल डौग एंगलबार्ट के बारे में जानते हैं, लेकिन जर्मनी की Telefunken कंपनी ने भी इसी दौरान एक माउस विकसित किया था।
- नाम: इसे "माउस" नहीं बल्कि "रोलकुगल" (Rollkugel) यानी 'रोलिंग बॉल' कहा जाता था।
- समय: इसे अक्टूबर 1968 में एक कंपनी पत्रिका में दिखाया गया था, जो एंगलबार्ट के डेमो से कुछ हफ्ते पहले की बात है।
- उपयोग: यह टेलीफ़ुकेन के SIG-100 मॉनिटर के लिए एक इनपुट डिवाइस था। इसने ज़ेरॉक्स (Xerox) और एप्पल (Apple) के माउस से बहुत पहले ही कर्सर कंट्रोल की तकनीक दुनिया को दिखा दी थी।
आविष्कारक का विजन: लाइट पेंसिल से बेहतर क्यों?
डौग एंगलबार्ट का मानना था कि माउस उस समय की 'लाइट पेंसिल' से बेहतर है क्योंकि:
- ऑपरेटर को स्क्रीन (CRT) के पास हाथ ले जाने की जरूरत नहीं पड़ती।
- यूजर के दोनों हाथ कीबोर्ड के पास रहते हैं, जिससे काम तेज होता है।
- यह डिवाइस स्क्रीन के किसी हिस्से को ब्लॉक नहीं करता।
निष्कर्ष
लकड़ी के उस पहले प्रोटोटाइप से लेकर जर्मनी के 'रोलकुगल' तक, माउस ने एक लंबा सफर तय किया है। आज यह हमारे कंप्यूटर अनुभव का अटूट हिस्सा है।

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